Uttar Pradesh: बस्ती में दरिंदगी, दुकानदार ने लड़की को बनाया अपनी हवस का शिकार

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Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक दुकानदार ने एक लड़की को अपनी हवस का शिकार बना लिया और पांच साल तक उसके साथ बलात्कार करता रहा। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था की स्थिति को उजागर करती है, बल्कि समाज में महिलाओं के प्रति हो रही हिंसा और बलात्कार की मानसिकता को भी स्पष्ट करती है।

घटना की पृष्ठभूमि

यह घटना बस्ती के ललगंज थाना क्षेत्र की है, जहां एक नाबालिग लड़की एक जन सेवा केंद्र पर फोटोकॉपी कराने गई थी। आरोप है कि दुकानदार ने लड़की को नशे का सेवन कराकर बलात्कार किया और इस घिनौनी हरकत का वीडियो भी बना लिया। इसके बाद, आरोपी ने लड़की को वीडियो दिखाने की धमकी देकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। यह घटना 2019 की बताई जा रही है, जब पीड़िता ने दुकानदार की ओर से उत्पीड़न का सामना करना शुरू किया।

बलात्कार की शुरुआत

जब लड़की को अकेला पाकर दुकानदार ने उसे नशा कराया और उसके साथ बलात्कार किया, तो उसने यह कहकर अपना बचाव किया कि यह सब मजाक में किया गया था। लेकिन वास्तविकता कुछ और ही थी। इसके बाद आरोपी ने वीडियो बनाकर लड़की को लगातार धमकाया और ब्लैकमेल किया। वह जानता था कि उसकी हरकतों का खुलासा करने पर वह उसे कैसे नुकसान पहुंचा सकता है। यह मामला न केवल एक नाबालिग लड़की के साथ होने वाले अपराध का है, बल्कि यह इस बात का भी सबूत है कि समाज में कुछ लोग कितने बेशर्म और बर्बर हो सकते हैं।

5 साल का आतंक

लड़की ने बताया कि इस दौरान दुकानदार ने उसे कई बार अपने दोस्तों के साथ बलात्कृत किया। वह लगातार उसे डराता रहा और धमकाता रहा कि यदि उसने किसी को बताया, तो वह वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर देगा। इस प्रकार, दुकानदार ने लड़की को अपने जाल में फंसा लिया और उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। यह स्थिति पांच सालों तक चलती रही, जिससे लड़की का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हुआ।

पुलिस की लापरवाही

हाल ही में, जब पीड़िता ने जिला महिला अस्पताल में चिकित्सा जांच कराने का प्रयास किया, तो उसे पुलिस और चिकित्सा कर्मचारियों से अव्यवस्थितता का सामना करना पड़ा। पीड़िता ने शुक्रवार को अस्पताल में रिपोर्ट किया, लेकिन चिकित्सा जांच के लिए उसे कई घंटों तक इंतजार करना पड़ा। यह बताया गया कि जब वह एक महिला कांस्टेबल के साथ अस्पताल पहुंची, तो चिकित्सक ने अन्य लोगों को चिकित्सा कक्ष से बाहर निकालने का आदेश दिया। इसके बाद विवाद उत्पन्न हुआ और डॉक्टर ने बयान दर्ज किए बिना जांच करने से इनकार कर दिया।

चिकित्सा जांच में देरी

डॉक्टर ने कहा कि पीड़िता की मां, जो उसकी शिकायत के लिए मौजूद नहीं थी, के बिना चिकित्सा जांच संभव नहीं है। इसके बाद पीड़िता ने मामले की जानकारी डीएम को दी। डीएम ने चिकित्सा अधीक्षक से जानकारी लेकर मामला समझा। इसके बाद, दूसरे दिन महिला कांस्टेबल ने सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ अस्पताल पहुंचकर जांच प्रक्रिया शुरू की। यह सब कुछ ऐसी स्थिति में हुआ, जहां पीड़िता पहले से ही मानसिक तनाव में थी और उसे अस्पताल में और अधिक समय बिताना पड़ा।

समाज की प्रतिक्रिया

इस मामले ने समाज के भीतर गंभीर चिंता उत्पन्न की है। महिलाओं के प्रति हो रही हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं, और इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गंभीर कदम उठाने की आवश्यकता है। स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने इस घटना की निंदा की है और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की है। समाज में ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए जागरूकता और शिक्षित करने की आवश्यकता है, ताकि महिलाएं अपनी आवाज उठा सकें और ऐसे उत्पीड़कों से बच सकें।

पीड़िता की मानसिक स्थिति

इस मामले में पीड़िता की मानसिक स्थिति बेहद गंभीर है। पांच सालों तक लगातार हो रहे बलात्कार और ब्लैकमेलिंग ने उसकी मानसिकता को पूरी तरह से प्रभावित किया है। पीड़िता ने कहा है कि वह अपनी आवाज उठाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसे हमेशा डराया गया और चुप रहने के लिए मजबूर किया गया। यह मानसिक दबाव उसे एक भयभीत और कमजोर इंसान बना देता है, जो अपने जीवन में आगे बढ़ने में असमर्थ है।

कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता

इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि कानून व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। पुलिस को इस प्रकार के मामलों में तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और अपराधियों को सजा दी जा सके। इसके लिए जरूरी है कि पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाई जाए और उनके मामले को गंभीरता से लिया जाए।

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