Kedarnath by-election: कांग्रेस ने प्रत्याशी की घोषणा की, इस बार पार्टी ने मनोज रावत पर लगाया दांव

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Kedarnath by-election: उत्तराखंड के केदारनाथ विधानसभा सीट के लिए कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। पार्टी ने इस बार मनोज रावत को उपचुनाव के लिए अपना प्रत्याशी बनाया है। यह चुनाव क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें कांग्रेस अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

उपचुनाव की तैयारी में तेज़ी

कांग्रेस द्वारा मनोज रावत के नाम की घोषणा के साथ ही केदारनाथ उपचुनाव की तैयारी में तेज़ी आ गई है। यह उपचुनाव कई कारणों से चर्चा में है, खासकर विधानसभा चुनावों के बाद राजनीतिक समीकरणों में आए बदलाव के चलते। कांग्रेस का मानना है कि मनोज रावत की छवि और स्थानीय मुद्दों की समझ उन्हें जीत दिलाने में मदद करेगी।

पांचवे दिन लिए गए नामांकन पत्र

केदारनाथ विधानसभा सीट के लिए नामांकन पत्र लेने की प्रक्रिया के पांचवे दिन कुल पांच उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र लिए, लेकिन अभी तक किसी ने भी अपने नामांकन पत्र दाखिल नहीं किए हैं। अब तक 11 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र प्राप्त किए हैं। केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन पत्रों का वितरण पिछले मंगलवार से शुरू हुआ था।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, “पांचवे दिन के दौरान जिन पांच उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र लिए उनमें आलोक कुमार, वीर सिंह बुंधेरा, रणप्रीत सिंह, सुमंत तिवारी और मनोज रावत शामिल हैं।”

नामांकन की प्रक्रिया

नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 29 अक्टूबर है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 30 अक्टूबर को होगी। नामांकन वापसी की तिथि 4 नवंबर निर्धारित की गई है। केदारनाथ विधानसभा के लिए उपचुनाव 20 नवंबर को होंगे, जिससे पहले सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपने प्रत्याशियों के चयन में तेजी लाएं।

ईवीएम मशीनों की पहली रैंडमाइजेशन

केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव में उपयोग होने वाली ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनों की पहली रैंडमाइजेशन प्रक्रिया भी संपन्न हो चुकी है। यह रैंडमाइजेशन प्रक्रिया एनआईसी कक्ष में जिला निर्वाचन अधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट सौरभ गहरवार की उपस्थिति में हुई। इस दौरान कई राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों ने भी भाग लिया।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने जानकारी दी कि “173 मतदान केंद्रों के लिए चुनाव प्रक्रिया के संचालन हेतु 192 मशीनों सहित रिजर्व मशीनों का उपयोग किया जाएगा। इसमें 332 कंट्रोल यूनिट, 332 बैलट यूनिट और 332 वीवीपीएटी मशीनें शामिल हैं।”

ट्रेनिंग और मशीनों की उपलब्धता

जिला निर्वाचन  अधिकारी ईवीएम मीनल गुलाटी  ने बताया कि 350 कंट्रोल यूनिट, 353 बैलट यूनिट और 354 वीवीपीएटी मशीनें उपलब्ध हैं, जिसमें से 18-18 कंट्रोल यूनिट और बैलट यूनिट ट्रेनिंग के लिए उपलब्ध कराई गई हैं। बाकी मशीनों की रैंडमाइजेशन आज की गई है ताकि चुनावी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित किया जा सके।

राजनीतिक स्थिति का विश्लेषण

कांग्रेस की ओर से मनोज रावत को उम्मीदवार बनाने के फैसले के पीछे यह सोच है कि रावत की स्थानीय पहचान और राजनीतिक अनुभव पार्टी को मजबूत स्थिति में ला सकता है। उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला होता आया है, और इस बार के उपचुनाव में दोनों पार्टियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है।

भाजपा की ओर से भी अपनी ताकत दिखाने के लिए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। भाजपा के जिला अध्यक्ष महावीर सिंह पंवार और अन्य नेताओं की उपस्थिति में चुनावी रणनीतियों पर चर्चा हो रही है।

स्थानीय मुद्दे और चुनावी रणनीतियाँ

केदारनाथ क्षेत्र में स्थानीय मुद्दों को लेकर चुनावी प्रचार की रणनीति तैयार की जा रही है। मनोज रावत को उम्मीद है कि वे स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित होकर चुनावी मैदान में उतरेगे, जिससे वे मतदाताओं का ध्यान आकर्षित कर सकें।

आगामी चुनावों में स्थानीय मुद्दों की अहमियत भी बढ़ गई है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़कें और रोजगार जैसे मुद्दे शामिल हैं। स्थानीय नेताओं की भागीदारी और सक्रियता से इन मुद्दों को चुनावी प्रचार में प्रमुखता दी जाएगी।

मतदाता जागरूकता

भविष्य में वोटर जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे, जिसमें स्थानीय लोगों को मतदान प्रक्रिया और उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया जाएगा। मतदान का महत्व समझाते हुए चुनावी प्रचार में युवाओं और महिलाओं को विशेष रूप से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

केदारनाथ उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं, और सभी पार्टियाँ इस चुनाव में जीत हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं। कांग्रेस ने मनोज रावत को उम्मीदवार बनाकर अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश की है, जबकि भाजपा भी किसी भी स्थिति में पीछे नहीं रहना चाहती। इस बार का चुनाव स्थानीय मुद्दों, चुनावी रणनीतियों और मतदाता जागरूकता के माध्यम से ही तय होगा।

इस उपचुनाव का परिणाम न केवल केदारनाथ क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि उत्तराखंड की राजनीतिक दिशा को भी निर्धारित करेगा।

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