Haridwar: गाडोवाली में तेज़ रफ्तार से खेतों में दौड़े हाथियों का झुंड, मची अफरातफरी

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Haridwar के गाडोवाली में अचानक हाथियों के एक झुंड ने खेतों से तेज़ रफ्तार में गुजरकर इलाके में दहशत फैला दी। हाथियों को देखकर स्थानीय लोग चीखने-चिल्लाने लगे और चारों तरफ अफरातफरी मच गई। हालांकि, इस घटना में किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है।

आवासी क्षेत्रों में हाथियों का घुसना जारी

हरिद्वार के आवासीय क्षेत्रों में जंगली हाथियों का प्रवेश रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां हाथियों ने शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में घुसपैठ की। हाल ही में एक हाथी जंगल से भटककर गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय तक पहुंच गया था। विश्वविद्यालय परिसर में हाथी के प्रवेश से छात्रों और कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया। परिसर में टहलते हुए हाथी को देखकर लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में हाथियों का बढ़ता खतरा

पहले हाथियों के झुंड को केवल हरिद्वार के जगजीतपुर इलाके में देखा जाता था, लेकिन अब यह समस्या गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय तक पहुंच चुकी है। इस विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई करते हैं, जिससे हाथियों के आने पर गंभीर खतरे की स्थिति बन जाती है।

वन विभाग की नाकामी और हाथियों को रोकने की योजना

वन विभाग हाथियों को रोकने में अब तक पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। हालांकि, विभागीय अधिकारियों का दावा है कि हाथियों को रोकने और वापस जंगल में भेजने के लिए एक विशेष टीम बनाई गई है। यह टीम हाथियों के आबादी में प्रवेश करते ही उन्हें वापस जंगल में भेजने का काम करती है।

हरिद्वार-लक्सर रोड पर हाथियों का दिखना आम

इससे पहले भी हरिद्वार-लक्सर रोड पर मिसरपुर और शिव विहार कॉलोनी में रात करीब नौ बजे हाथियों के चार झुंड देखे गए थे। हाथियों की उपस्थिति से कॉलोनी में भगदड़ मच गई। ये हाथी करीब आधे घंटे तक सड़क और गलियों में घूमते रहे। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस इलाके में हाथियों का आना-जाना अब आम बात हो गई है, जिससे लोग हमेशा खतरे में रहते हैं।

इलाके में दहशत का माहौल

हाथियों के झुंड के कारण स्थानीय निवासियों के बीच हमेशा दहशत का माहौल बना रहता है। हालांकि, यह राहत की बात है कि अब तक इन हाथियों ने किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया है।

हाथियों का व्यवहार और उनके जंगल से बाहर आने के कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के जंगल से बाहर आने का मुख्य कारण उनका  (सिकुड़ता हुआ निवास स्थान) है। निर्माण कार्यों और मानव गतिविधियों के कारण हाथियों का प्राकृतिक आवास लगातार घट रहा है। भोजन और पानी की तलाश में हाथी आवासीय इलाकों में प्रवेश कर जाते हैं।

स्थानीय निवासियों की समस्या और सुझाव

स्थानीय लोगों का कहना है कि हाथियों की समस्या को हल करने के लिए वन विभाग को सख्त कदम उठाने चाहिए। हाथियों को रोकने के लिए जंगल के किनारे मजबूत बैरिकेडिंग और फेंसिंग की जरूरत है। इसके साथ ही, मानव और वन्यजीवों के संघर्ष को कम करने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाने की आवश्यकता है।

वन विभाग की तैयारी

वन विभाग का कहना है कि वह हाथियों को रोकने के लिए अपनी रणनीति को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है। अधिकारियों का दावा है कि हाथियों के मूवमेंट को ट्रैक करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही, स्थानीय लोगों को भी इन परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।

हरिद्वार में हाथियों का आवासीय क्षेत्रों में प्रवेश एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए वन विभाग को ठोस कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही, स्थानीय लोगों को सतर्क रहने और हाथियों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करना होगा कि मनुष्यों और वन्यजीवों के बीच सामंजस्य बना रहे और किसी भी प्रकार का नुकसान न हो।

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