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Supreme Court में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और विवादों पर अहम सुनवाई

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Supreme Court: देशभर में मंदिरों और मस्जिदों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के सम्भल जिले में स्थित जामा मस्जिद का सर्वे आदेश के बाद हिंसा फैल गई थी। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने ‘पूजा स्थलों की सुरक्षा’ और 1991 में बने कानून से संबंधित याचिका पर सुनवाई करने का ऐलान किया है। इस मुद्दे पर जब अदालत की सुनवाई होगी, तब क्या होगा, आइए जानते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में कब होगी सुनवाई?

सुप्रीम कोर्ट ने 1991 के ‘पूजा स्थलों की सुरक्षा’ और संबंधित कानून से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की तारीख 4 दिसंबर, 2024 तय की है। यह सुनवाई Chief Justice of India, संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच करेगी। इस महत्वपूर्ण केस पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पी. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल होंगे।

Supreme Court में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और विवादों पर अहम सुनवाई

किसकी याचिका पर होगी सुनवाई?

इस मामले में जमीअत उलमा-ए-हिंद और गुलजार अहमद नूर मोहम्मद आजमी नामक याचिकाकर्ता हैं। इनकी ओर से इस मामले में वकील एजाज मक़बूल कोर्ट में अपना पक्ष प्रस्तुत करेंगे। याचिका में पूजा स्थलों की सुरक्षा और संबंधित कानून को लेकर विशेष विचार करने की मांग की गई है।

1991 का ‘Places of Worship Act’ क्या है?

1991 में सरकार द्वारा लाया गया ‘Places of Worship Act’ एक महत्वपूर्ण कानून है, जो धार्मिक स्थलों की सुरक्षा से संबंधित है। इस कानून के अनुसार, स्वतंत्रता प्राप्ति के समय (15 अगस्त 1947) जिस रूप में पूजा स्थल मौजूद था, उसे वैसा का वैसा बनाए रखने की बात की गई है। इसका मतलब यह है कि कोई भी व्यक्ति या समूह किसी पूजा स्थल को पूरी तरह से या आंशिक रूप से एक धर्म के पूजा स्थल से दूसरे धर्म के पूजा स्थल में बदलने का काम नहीं कर सकता है।

यह कानून धार्मिक स्थलों के मालिकाना हक को लेकर विवादों को समाप्त करने के उद्देश्य से लाया गया था। इसके अंतर्गत यह भी उल्लेख किया गया था कि बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि विवाद को छोड़कर, स्वतंत्रता प्राप्ति के समय जो भी धार्मिक स्थल था, वह उसी रूप में संरक्षित रहेगा।

1991 के कानून का उद्देश्य

‘Places of Worship Act’ का मुख्य उद्देश्य पूजा स्थलों से जुड़े विवादों को समाप्त करना था। यह कानून पूजा स्थलों के रूप को बदलने से रोकता है और इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि स्वतंत्रता प्राप्ति के समय जो पूजा स्थल था, वह वैसा ही रहे। यह कानून धार्मिक स्थानों के बीच हो रहे विवादों को शांति से निपटाने के लिए लागू किया गया था।

इस कानून में एक महत्वपूर्ण धारा है, धारा 3, जो यह स्पष्ट करती है कि किसी भी पूजा स्थल को एक धर्म से दूसरे धर्म के पूजा स्थल में बदलने का प्रयास करना अपराध है। यही कारण है कि इस कानून को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं और विवाद भी बने रहे हैं।

जामा मस्जिद का विवाद

उत्तर प्रदेश के सम्भल जिले में स्थित जामा मस्जिद के सर्वे के बाद उत्पन्न हुई हिंसा ने इस मुद्दे को और अधिक गरमा दिया। हाल ही में इस मस्जिद का सर्वे करने के बाद धार्मिक रूप से संवेदनशील स्थिति बन गई थी, जो अब तक देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी है। जामा मस्जिद की स्थिति और पूजा स्थल की सुरक्षा को लेकर यह विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को महत्वपूर्ण मानते हुए 4 दिसंबर को सुनवाई की तारीख तय की है। यह सुनवाई धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और पूजा स्थलों से संबंधित कानूनों के दायरे में आएगी। यह सुनवाई न केवल धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिहाज से, बल्कि देश के धार्मिक सौहार्द के लिए भी महत्वपूर्ण है।

अगले कदम

अब यह देखा जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या निर्णय लेता है। कोर्ट का निर्णय धार्मिक स्थलों के विवादों को सुलझाने में मददगार हो सकता है, और यह कई अन्य विवादों को भी प्रभावित कर सकता है जो पूजा स्थलों के रूप और सुरक्षा को लेकर उत्पन्न हो रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय देश में पूजा स्थलों की सुरक्षा और उनके रूप को लेकर बढ़ते विवादों को सुलझाने के लिए अहम साबित हो सकता है। 1991 का ‘Places of Worship Act‘ पहले ही विवादों के घेरे में रहा है और अब इस पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सभी के लिए महत्वपूर्ण होगा। इससे पहले, जामा मस्जिद जैसी घटनाओं ने इस मुद्दे को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या आदेश जारी करता है और यह फैसला भारतीय समाज में धार्मिक सौहार्द और सुरक्षा को कैसे प्रभावित करता है।

Manoj kumar

Editor-in-chief

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