Uttarakhand: स्वास्थ्य सचिव का अधिकारियों को दो टूक, फायर सेफ्टी में लापरवाही पर नपेंगे अस्पताल के सीएमएस

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देहरादून। उत्तराखंड में अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में फायर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जारी किए गए एसओपी (स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) के बाद भी कई स्थानों पर इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

इसके बावजूद, अब राज्य के स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने इस मुद्दे को लेकर सख्त रुख अपनाया है और अस्पतालों को चेतावनी दी है कि यदि कहीं भी कोई अप्रिय घटना घटित होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) की होगी।

स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि एसओपी जारी होने के बाद सभी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को फायर सुरक्षा की व्यवस्था दुरुस्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एसओपी के तहत फायर सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच, कर्मचारियों को फायर सेफ्टी ट्रेनिंग, और अस्पताल परिसर में आपातकालीन उपायों को सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

इसके बावजूद यदि अस्पतालों में इस दिशा में कोई खास सुधार नहीं हुआ है, तो यह चिंता का विषय है। स्वास्थ्य सचिव ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में किसी अस्पताल में आगजनी की कोई घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी अस्पताल के सीएमएस पर होगी।

उनका कहना था कि प्रत्येक अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के सीएमएस को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन गंभीरता से करना चाहिए, ताकि मरीजों और अस्पताल में काम करने वाले स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेl

उत्तराखंड के अस्पतालों में फायर ऑडिट के मामले में अनदेखी की जा रही है, जिससे अस्पतालों में सुरक्षा की स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एसओपी जारी होने के बावजूद यदि इस पर अमल नहीं किया जाता है, तो स्वास्थ्य विभाग को इसे लेकर कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है।

राज्य सरकार की ओर से यह भी निर्देश दिए गए हैं कि हर अस्पताल को जल्द से जल्द अपने फायर सुरक्षा प्रणालियों की समीक्षा और सुधार करना होगा। इस बीच, यह मामला राज्य के अस्पतालों में सुरक्षा के बुनियादी ढांचे की खामियों को उजागर कर रहा है, जिसे सुधारने के लिए जल्द से जल्द कार्रवाई की आवश्यकता है।

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