Dehradun: इनायत सोशल वेलफेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष दानिश गौड ने आपदा पीड़ितों के लिए भेजी खाद्य सामग्री, राहत कोष में दी 50हजार की धनराशि

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देहरादून। हर्षिल, धराली आपदा को लेकर अनेक संस्थाएं व संगठन आपदा पीड़ितों की सेवा में लगे है। वहीं आज इनायत सोशल वेलफेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष दानिश गौड ने देहरादून पहुंच आपदा पीड़ितों के लिए राहत सामग्री के साथ ही मुख्यमंत्री राहत कोष में 50हजार की धनराशि भी राहत कोष में दी है। इस मौके पर बाढ़ आपदा मंत्री विनय रोहिल्ला ने खाद्य सामग्री से भरे वाहन को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। इस मौके पर उनके साथ राज्य मंत्री गीता राम गौड़ व आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन भी मौजूद रहे।

आपको बता दे कि इनायत सोशल वेलफेयर ट्रस्ट लगभग 5 साल से समाज सेवा में लगी है। ट्रस्ट के अध्यक्ष व सदस्य प्रदेश कार्यकारिणी अल्पसंख्यक मोर्चा भाजपा दानिश गौड ने बताया कि इन पांच वर्षों में ट्रस्ट द्वारा 28 निर्धन कन्याओं का विवाह संपन्न करने के साथ ही 8 निर्धन लोगों को आवास बनाकर भी दिए गए हैं इसके साथ ही 18–15 के टेंट, 10000 जूते की जोड़ी, कोट व कम्बल का वितरण भी उनकी ट्रस्ट द्वारा किया गया है। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में भी उनके ट्रस्ट द्वारा खाद्य पदार्थ की 8000 किट वितरित की गई।

 

उन्होंने कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा है और उनके सेवा कार्य आगे भी इसी प्रकार जारी रहेंगे। उन्होंने बताया अब उनके द्वारा प्रदेश की हर विधानसभा में प्राइमरी स्कूल के 50 हजार बच्चों को वॉटर बॉटल वितरित करने का कार्य किया जा रहा है और अभी तक लगभग पांच विधानसभाओं में यह कार्य पूरा भी किया जा चुका है।

जाने आपदा पर क्या बोले राज्य मंत्री विनय रोहिल्ला

इस मौके पर बाढ़ आपदा राज्यमंत्री विनय रोहिल्ला ने उत्तरकाशी धराली आपदा पर बोलते हुए कहा कि धराली में अब जनजीवन लगभग पूरी तरह बहाल हो गया है। खाद्यान्न आपूर्ति के साथ ही इंटरनेट कनेक्टिविटी भी पूरी तरह बहाल हो गई है इसके पीछे प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रभावशाली अभूतपूर्व ऑपरेशन की कार्रवाई सुनिश्चित रही है। जिसके कारण पुलिस प्रशासन के साथ ही आपदा प्रबंधन द्वारा भी तेज गति से कार्य कर तमाम व्यवस्थाओं को बहाल किया गया है। विपक्ष द्वारा उठाए गए आरोपों के जवाब में बोलते हुए उन्होंने कहा कि गलत तत्वों के आधार पर विपक्ष अनावश्यक बातें करता है जबकि जैसे ही प्रशासन के संज्ञान में आता है आपदा पीड़ित को तत्काल 5000 की धनराशि निर्गत इसलिए कर दी जाती है क्योंकि उस समय आपदा पीड़ित कि जेब के अंदर कोई साधन नहीं होते हैं। जिससे कि वह अपने जीवन को आगे बढ़ा सके। फिर उसी दिशा में सरकार आगे का कार्य करती है। और नुकसान के आकलन के बाद धनराशि को स्वीकृत कर आपदा पीड़ित को राहत पहुंचाने का कार्य किया जाता है।

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