जन्मदिन पर लवलीना ने रचा इतिहास, चीन की मुक्केबाज को 5-0 से हराकर जीता स्वर्ण पदक

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मैरी कॉम के बाद लवलीना का जलवा, 12 साल बाद भारत को मिला महिला बॉक्सिंग में एशियाड गोल्ड

नई दिल्ली। भारतीय मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन के लिए 2 अक्टूबर का दिन दोहरी खुशियां लेकर आया। अपने 29वें जन्मदिन पर उन्होंने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। महिलाओं के 75 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में लवलीना ने चीन की बाओ जियी को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ उन्होंने न केवल अपने एशियाई खेलों के पदकों का रंग बदला, बल्कि इस भार वर्ग में भारत को पहली बार स्वर्ण पदक भी दिलाया।

फाइनल में लवलीना का शानदार प्रदर्शन, चीन की मुक्केबाज को नहीं दिया मौका

स्वर्ण पदक के मुकाबले में लवलीना का सामना चीन की बाओ जियी से हुआ। दोनों मुक्केबाजों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। बाओ ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया, लेकिन लवलीना ने धैर्य और सूझबूझ के साथ उनका सामना किया।

भारतीय मुक्केबाज ने अपनी रणनीति के मुताबिक दूरी बनाए रखी और सही समय पर सटीक पंच लगाए। उन्होंने चीनी मुक्केबाज के आक्रमण से बचते हुए मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत की। आखिरकार पांचों जजों ने लवलीना के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्होंने 5-0 से जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक हासिल कर लिया।

जन्मदिन पर मिला करियर का यादगार तोहफा

2 अक्टूबर 1997 को असम में जन्मीं लवलीना के लिए इस बार जन्मदिन बेहद खास बन गया। 29 साल की उम्र में उन्होंने एशियाई खेलों का पहला स्वर्ण पदक जीतकर अपने करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली।

इससे पहले 2022 में आयोजित हांगझोउ एशियाई खेलों में लवलीना ने रजत पदक जीता था। अब 2026 के आइची-नागोया एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतकर उन्होंने अपने पिछले प्रदर्शन को और बेहतर कर लिया है। वह लगातार दो एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचने वाली भारत की पहली महिला मुक्केबाज भी बनीं।

75 किलोग्राम भार वर्ग में भारत को पहली बार मिला स्वर्ण

लवलीना की इस जीत ने भारतीय महिला मुक्केबाजी के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। महिलाओं के 75 किलोग्राम भार वर्ग में भारत को एशियाई खेलों में पहली बार स्वर्ण पदक मिला है।

इससे पहले इस भार वर्ग में भारतीय मुक्केबाजों ने कांस्य और रजत पदक जीते थे। वर्ष 2010 में ग्वांगझू एशियाई खेलों में कविता गोयत ने कांस्य पदक हासिल किया था। इसके बाद 2014 में इंचियोन में पूजा रानी ने कांस्य पदक जीता। 2022 के हांगझोउ एशियाई खेलों में लवलीना ने रजत पदक अपने नाम किया था। अब 2026 में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर भारत का इंतजार खत्म कर दिया।

महिलाओं के 75 किग्रा वर्ग में भारत के पदक

वर्ष एशियाई खेल खिलाड़ी पदक
2010 ग्वांगझू कविता गोयत कांस्य
2014 इंचियोन पूजा रानी कांस्य
2022 हांगझोउ लवलीना बोरगोहेन रजत
2026 आइची-नागोया लवलीना बोरगोहेन स्वर्ण

मैरी कॉम के बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज

लवलीना बोरगोहेन ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर दिग्गज मुक्केबाज मैरी कॉम के साथ अपना नाम दर्ज करा लिया है। भारत को महिला मुक्केबाजी में पहला एशियाड स्वर्ण पदक 2014 में मैरी कॉम ने दिलाया था। उन्होंने इंचियोन एशियाई खेलों में 51 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था।

इसके बाद भारतीय महिला मुक्केबाजों को एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक के लिए 12 साल का इंतजार करना पड़ा। लवलीना ने 2026 में 75 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण जीतकर इस इंतजार को खत्म किया। वह मैरी कॉम के बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बन गई हैं।

लवलीना की उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि वह एशियाई खेलों में स्वर्ण और रजत दोनों पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला मुक्केबाज बन गई हैं। मैरी कॉम ने भी एशियाई खेलों में दो पदक जीते थे, लेकिन उनके खाते में एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक है।

सेमीफाइनल में कजाखस्तान की मुक्केबाज को दी थी मात

फाइनल से पहले लवलीना को सेमीफाइनल में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा था। उनका मुकाबला कजाखस्तान की नताल्या बोगदानोवा से हुआ, जो 70 किलोग्राम भार वर्ग की विश्व चैंपियन रह चुकी हैं।

दोनों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। शुरुआती दौर में संघर्ष करने के बाद लवलीना ने शानदार वापसी की और मुकाबले के अंतिम चरण में आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने 3-2 के स्प्लिट डिसीजन से जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई।

सेमीफाइनल में जीत के साथ ही लवलीना लगातार दो एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बन गई थीं। इसके बाद उन्होंने फाइनल में भी अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए चीन की बाओ जियी को हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया।

ओलंपिक पदक से विश्व चैंपियन बनने तक का सफर

लवलीना ने अपने करियर में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने 2018 और 2019 की विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीते। इसके बाद टोक्यो ओलंपिक 2020 में महिलाओं के 69 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक हासिल कर देश का नाम रोशन किया।

इस उपलब्धि के साथ वह ओलंपिक पदक जीतने वाली भारत की तीसरी मुक्केबाज और मैरी कॉम के बाद दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं।

इसके बाद लवलीना ने 75 किलोग्राम भार वर्ग में अपना प्रदर्शन जारी रखा। वर्ष 2022 की एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। 2023 की विश्व चैंपियनशिप में भी वह स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहीं। इसी वर्ष हांगझोउ एशियाई खेलों में उन्होंने रजत पदक हासिल किया। 2026 के राष्ट्रमंडल खेलों में भी उनके खाते में रजत पदक आया।

लवलीना बोरगोहेन की प्रमुख उपलब्धियां

प्रतियोगिता वर्ष पदक भार वर्ग
विश्व चैंपियनशिप 2018 कांस्य 69 किग्रा
विश्व चैंपियनशिप 2019 कांस्य 69 किग्रा
टोक्यो ओलंपिक 2020 कांस्य 69 किग्रा
एशियाई चैंपियनशिप 2021 कांस्य वेल्टरवेट
एशियाई चैंपियनशिप 2022 स्वर्ण 75 किग्रा
एशियाई खेल 2022 रजत 75 किग्रा
विश्व चैंपियनशिप 2023 स्वर्ण 75 किग्रा
राष्ट्रमंडल खेल 2026 रजत 75 किग्रा
एशियाई खेल 2026 स्वर्ण 75 किग्रा

लवलीना को वर्ष 2020 में अर्जुन पुरस्कार और 2021 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वर्ष 2022 में उन्हें असम पुलिस में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) नियुक्त किया गया।

भारत की पदक तालिका में जुड़ा 12वां स्वर्ण

लवलीना के स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही एशियाई खेलों में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या 12 हो गई है। भारत ने अब तक कुल 70 पदक अपने नाम किए हैं, जिनमें 12 स्वर्ण, 24 रजत और 34 कांस्य पदक शामिल हैं।

पदक तालिका में भारत सातवें स्थान पर है। भारतीय खिलाड़ियों ने तीरंदाजी, निशानेबाजी, एथलेटिक्स, कबड्डी और क्रिकेट समेत विभिन्न खेलों में पदक हासिल किए हैं। लवलीना के स्वर्ण ने भारतीय दल के पदकों की संख्या में एक और इजाफा किया है।

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