CBRI Roorkee: वासुंधरा ताल पर देश का पहला स्वदेशी GLOF निगरानी एवं पूर्व चेतावनी स्टेशन स्थापित

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रुड़की। CSIR–CBRI, रुड़की के श्री चंद्रभान पटेल एवं श्री कांति लाल सोलंकी के नेतृत्व में लगभग 16,000 फीट की ऊँचाई पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में स्वदेशी देश का पहला GLOF निगरानी एवं पूर्व चेतावनी स्टेशन प्रणाली की स्थापना; संभावित GLOF घटना से लगभग दो घंटे पूर्व चेतावनी देने का लक्ष्य।

दोनों ने उच्च हिमालयी क्षेत्र के अत्यंत दुर्गम भूभाग एवं प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों में वासुंधरा ताल का दौरा कर स्वदेशी निगरानी एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लगभग दो घंटे पहले चेतावनी देने की क्षमता का लक्ष्य। 

 

इस स्वदेशी प्रणाली का प्रमुख उद्देश्य हिमनद झील की परिस्थितियों में होने वाले परिवर्तनों की निरंतर निगरानी करना तथा संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की स्थिति में संबंधित एजेंसियों को समय रहते सचेत करने में सहायता प्रदान करना है। प्रणाली को संभावित GLOF घटना से लगभग दो घंटे पहले चेतावनी उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ विकसित किया गया है। वास्तविक चेतावनी अवधि घटना की प्रकृति, उपलब्ध निगरानी आंकड़ों, संकेतों के विश्लेषण और संचार व्यवस्था की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगी।

उन्नत सेंसरों से लैस स्वदेशी निगरानी प्रणाली

स्थापित प्रणाली में एकीकृत मौसम स्टेशन, तैरते एवं जलमग्न जल-स्तर सेंसर, एक्सेलेरोमीटर एवं टिल्ट सेंसर, हिम की गहराई मापने वाला सेंसर, हिम के भीतर तापमान मापने के लिए सात सेंसर तथा झील की सतह के तापमान का सेंसर शामिल हैं।
इन उपकरणों से मौसम, झील के जल-स्तर, हिम संचय, तापमान में परिवर्तन तथा संभावित हलचलों से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। इन आंकड़ों का विश्लेषण संभावित जोखिमों के वैज्ञानिक आकलन और समय पर चेतावनी जारी करने की प्रक्रिया को मजबूत बनाने में उपयोगी होगा।

कठिन हिमालयी परिस्थितियों में तकनीकी उपलब्धि

वासुंधरा ताल भारत-तिब्बत सीमा के निकट नीति दर्रे के आसपास स्थित एक दुर्गम उच्च हिमालयी क्षेत्र में है। लगभग 16,000 फीट की ऊँचाई पर उपकरणों को ले जाना, स्थापित करना तथा उन्हें कार्यशील बनाए रखने के लिए विशेष तकनीकी दक्षता, सावधानीपूर्वक योजना और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक होता है।

विभिन्न एजेंसियों का सहयोग

इस चुनौतीपूर्ण कार्य में सहयोग के लिए CSIR–CBRI ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF); राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF); तथा उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के प्रति आभार व्यक्त किया है।

स्वदेशी तकनीक एवं पूर्व चेतावनी क्षमता

CSIR–CBRI, रुड़की द्वारा GLOF (हिमनद झील के अचानक फटने से उत्पन्न बाढ़) संबंधी खतरों की निगरानी के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित कर स्थापित की गई है। आज तक की 13 अक्टूबर 2026 की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना की लागत लगभग ₹61 लाख बताई गई है, जबकि तुलनीय तकनीक की लागत लगभग ₹8 करोड़ बताई गई है। इस प्रणाली का उद्देश्य संभावित GLOF घटना से लगभग दो घंटे पूर्व चेतावनी उपलब्ध कराने में सहायता करना है।

इस स्थापना कार्य एवं संबंधित फील्ड गतिविधियों का समन्वय CSIR–CBRI के निदेशक, प्रोफेसर आर. प्रदीप कुमार के मार्गदर्शन में किया गया। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि में योगदान देने वाले अन्य वैज्ञानिक एवं तकनीकी कार्मिकों के नाम निम्नलिखित हैं:

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