
पुतिन ने नवंबर में त्रिपक्षीय वार्ता को लेकर दिए संकेत
मॉस्को। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने रूस के साथ संभावित युद्ध की आशंकाओं को हवा देने वाले बयानों को ‘राजनीतिक विक्षिप्तता’ करार देते हुए कहा कि रणनीतिक स्तर पर रूस को पराजित करना यूरोप के लिए संभव नहीं है। पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया कि रूस की यूरोपीय देशों के साथ युद्ध करने की कोई मंशा नहीं है। उनके इस बयान के बीच रूस, अमेरिका और यूक्रेन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता दोबारा शुरू होने की संभावनाएं भी सामने आई हैं।
रूस को हराना आसान नहीं: पुतिन
यूरोपीय देशों की ओर से रूस को संभावित खतरे के रूप में पेश किए जाने पर सवाल उठाते हुए पुतिन ने कहा कि रूस के खिलाफ युद्ध की तैयारी का माहौल बनाना निराधार है। उनके मुताबिक, यूरोपीय देश भी रूस के साथ सीधे सैन्य टकराव से बचना चाहते हैं। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि अतीत में रूस को हराने की कोशिश करने वाली ताकतों को अंततः यह समझना पड़ा कि उसके साथ सहयोग और मित्रता का रास्ता अधिक बेहतर है।
पुतिन के बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बना हुआ है और यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर फिर शुरू हो सकती है त्रिपक्षीय वार्ता
पुतिन ने संकेत दिया कि रूस, अमेरिका और यूक्रेन के बीच बातचीत का सिलसिला दोबारा शुरू करने पर सहमति बनी है। रूसी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, इससे पहले रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव ने बताया था कि वार्ता 10 नवंबर के बाद फिर से शुरू हो सकती है।
पुतिन ने कहा कि रूस संघर्ष का समाधान निकालने के लिए बातचीत के जरिए रास्ता तलाशने का प्रयास करेगा। हालांकि, वार्ता दोबारा शुरू होने की संभावना के बावजूद युद्ध समाप्त करने के लिए दोनों पक्षों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनना अभी बाकी है।
यूक्रेन को बताया भाईचारे वाला देश
रूसी राष्ट्रपति ने यूक्रेन को अपना ‘भाईचारे वाला देश’ बताते हुए दावा किया कि रूसी और यूक्रेनी लोगों के बीच ऐतिहासिक और आनुवंशिक समानताएं हैं। उन्होंने दोनों देशों के लोगों को एक ही समुदाय का हिस्सा बताते हुए संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की आवश्यकता पर जोर दिया।
दूसरी ओर, पुतिन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि यूक्रेनी प्रशासन अपने नागरिकों को युद्ध में झोंक रहा है और लोगों को सड़कों से पकड़कर सैन्य मोर्चों पर भेजा जा रहा है। ये आरोप रूसी राष्ट्रपति की ओर से लगाए गए हैं।
अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने क्यों की पुतिन से मुलाकात?
पुतिन की यह टिप्पणी अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ उनकी मुलाकात के बाद आई है। 21 अक्टूबर को सेंट पीटर्सबर्ग में हुई इस बैठक का उद्देश्य यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के प्रस्तावों पर चर्चा करना और आगे की बातचीत के लिए संभावनाएं तलाशना था।
इससे पहले विटकॉफ ने नॉर्वे में यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी मुलाकात की थी। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक में हुई बातचीत के नतीजों की समीक्षा भी अमेरिकी दूत के एजेंडे में शामिल थी। लगातार हो रही इन मुलाकातों से रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर नए कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीद बढ़ी है।
2014 से शुरू हुआ विवाद, 2022 में बड़े युद्ध में बदला
रूस और यूक्रेन के बीच मौजूदा संघर्ष की पृष्ठभूमि वर्ष 2014 से जुड़ी है। उस दौरान रूस ने क्रीमिया पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था, जबकि पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र में रूसी समर्थित अलगाववादियों और यूक्रेनी सेना के बीच लड़ाई शुरू हो गई थी।
24 फरवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन पर व्यापक सैन्य हमला शुरू किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। फरवरी 2022 के अंत में बेलारूस में वार्ता शुरू हुई और मार्च में तुर्किये के इस्तांबुल में भी बातचीत हुई, लेकिन क्षेत्रीय नियंत्रण, यूक्रेन की तटस्थता और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी।
मई 2025 में तुर्किये में दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष बातचीत का एक और दौर हुआ। इसके बाद 2026 की शुरुआत में अमेरिका की मध्यस्थता से जनवरी और फरवरी में वार्ता के कई दौर आयोजित किए गए। हालांकि, फरवरी के बाद बातचीत की प्रक्रिया में लंबा अंतराल आ गया।
सितंबर 2026 में अमेरिकी नेतृत्व में कूटनीतिक प्रयासों को फिर गति देने की कोशिश की गई। अब पुतिन और अमेरिकी दूत की मुलाकात के बाद नवंबर में रूस, अमेरिका और यूक्रेन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता दोबारा शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
शांति की राह में अब भी कई चुनौतियां
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्त कराने के लिए बातचीत की संभावनाएं जरूर बनी हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच मतभेद अब भी गंभीर हैं। क्षेत्रीय नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य में यूक्रेन की स्थिति जैसे सवाल किसी भी समझौते के लिए निर्णायक होंगे। ऐसे में प्रस्तावित त्रिपक्षीय वार्ता से शांति की दिशा में कोई ठोस प्रगति होती है या नहीं, इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।