रुड़की सीट पर उलझा हार जीत का समीकरण

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रुड़की। भाजपा का गढ़ कही जाने वाली रुड़की विधानसभा क्षेत्र में इस बार भाजपा व कांग्रेस के बीच मुकाबला दिलचस्प है।लेकिन कम वोटिंग होने के कारण हार जीत का समीकरण उलझ गया है।


चुनाव नतीजा आमने सामने में फंसा होने के चलते जानकार अभी कुछ भी भविष्यवाणी करने से कतरा रहे हैं।


जिसके वह अभी भी जातिगत आधार पर गुणा भाग करने में लगे हैं।
रुड़की विधान सभा में मतदान हुए चार दिन बीत गए हैं, लेकिन 2017 के मुकाबले इस बार चुनावी विशेषज्ञ कोई भी भविष्यवाणी करने से कतरा रहे हैं और मतदान के बाद अब इसे सीधा मुकाबला मान रहे हैं। चुनावी विशेषज्ञों की सबसे ज्यादा नजर भाजपा व कांग्रेस से इतर अन्य दलों के प्रत्याशियों पर लगी है उन्होंने किस पार्टी को कितना नुकसान पहुंचाया है। वहीं, उनकी नजर बिरादरीवार मतदाताओं पर भी हैं किस बिरादरी का कितना वोट अपनी बिरादरी के प्रत्याशी पर न जाकर दूसरे प्रत्याशी पर पहुंच रहा है। हालांकि जीत का दावा तो सभी दल के समर्थक कर रहे हैं लेकिन दिलचस्प यह होगा कि इस बार हार जीत का अंतर कितना होगा। क्योंकि, चुनाव पर बारीकी से नजर रखने वाले हार जीत का अंतर मामूली ही मान रहे हैं। वह किसी भी प्रत्याशी को बंपर मतो से जीत नहीं दे रहे हैं। वही सबकी नजर बसपा ,असपा व एक निर्दलीय प्रत्याशी पर भी लगी हुई है।कियोकि यही प्रत्याशी कांग्रेस व भाजपा की हार जीत का अंतर तय करेंगे। वहीं सट्टा बाजार भी जहां मतदान से पूर्व नतीजों को लेकर अपनी भविष्यवाणी कर रहा था वह भी फिलहाल खामोशी बरते हुए हैं। हालांकि 10 मार्च को नतीजे आने तक कांग्रेस भाजपा के बीच हुए चुनाव क्या रुख पलटता है नजर बनी रहेगी।

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