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International Tiger Day 2024: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ी, चुनौतियां भी बढ़ी, वन विभाग अब इस प्रक्रिया में जुटा है

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International Tiger Day 2024: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस स्थिति में, विभाग के सामने चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। इसे कम करने के लिए कॉर्बेट पार्क प्रशासन एआई तकनीक का सहारा ले रहा है। एक निजी संस्थान एआई तकनीक के कैमरे लगा रहा है।

International Tiger Day 2024: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ी, चुनौतियां भी बढ़ी, वन विभाग अब इस प्रक्रिया में जुटा है

कॉर्बेट पार्क में बाघों के संरक्षण की प्रक्रिया सफल हो रही है। पिछले वर्षों में राज्य में बाघों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कॉर्बेट पार्क 150-160 बाघों के आवास के लिए उपयुक्त माना जाता है। बढ़ती संख्या के कारण बाघों के व्यवहार में बदलाव देखा जा रहा है। उनकी जनसंख्या की ओर बढ़ते रुझान से वन्यजीव विशेषज्ञ भी चिंतित हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञ और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) बढ़ती बाघों की संख्या के बेहतर प्रबंधन के लिए विचार-विमर्श शुरू कर चुके हैं। इसमें उनके लिए नए स्थान तैयार करने की चुनौती है। बता दें कि तीन से चार साल के बाघों को बफर जोन में बाघिन के साथ घूमते देखा गया है।

एआई तकनीक कैमरे लगाए गए

मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए कॉर्बेट पार्क निजी संगठन की मदद ले रहा है। नोएडा की बैलियांस एनालिटिक्स प्राइवेट लिमिटेड मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए काम कर रही है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के उप निदेशक, दिगंत नायक ने कहा कि एआई कैमरे निजी संस्था द्वारा बसितिला, धिकुली में लगाए जा रहे हैं। एआई कैमरों से बाघों और हाथियों की उपस्थिति की जानकारी ईमेल और संदेशों के रूप में वन अधिकारियों को मिलती है। जैसे ही अलर्ट आता है, वनकर्मी मौके पर पहुंचते हैं और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए काम करते हैं। अगर यह तकनीक प्रभावी साबित होती है, तो एआई कैमरे अन्य स्थानों पर भी लगाए जाएंगे।

WII कॉर्बेट की कैरिंग कैपेसिटी की जांच करेगा

कॉर्बेट पार्क ने बढ़ती बाघों की संख्या को देखते हुए मुख्य वन्यजीव वार्डन को कैरिंग कैपेसिटी की जांच के लिए पत्र लिखा है। WII की टीम कॉर्बेट पार्क आ सकती है। टीम कॉर्बेट पार्क में बाघों की कैरिंग कैपेसिटी की जांच करेगी और यदि बाघों की संख्या क्षमता से अधिक होती है, तो उन्हें स्थानांतरित करने के प्रयास भी किए जाएंगे। साथ ही, वन क्षेत्रों को इस तरह तैयार किया जाएगा कि बाघों को पर्याप्त भोजन और सुरक्षा मिल सके।

कॉर्बेट पार्क में बाघ परिवार का बढ़ना

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व को बाघों का गढ़ कहा जाता है। कॉर्बेट की जैव विविधता बाघों के आवास के लिए उपयुक्त है। यहां हर चार साल में 10 से 20 बाघों की वृद्धि होती है। 2022 में किए गए जनगणना के आधार पर, कॉर्बेट पार्क में 262 बाघ रिकॉर्ड किए गए थे। दूसरी ओर, वर्तमान में देश में बाघों की संख्या सालाना छह प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। इससे बाघों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह बाघों के संरक्षण के काम में सुधार का अच्छा संकेत है। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की चुनौती भी है। पार्क एआई तकनीक सहित “लिविंग विद टाइगर” के तहत भी काम कर रहा है।

Manoj kumar

Editor-in-chief

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