Yamunotri Highway हुआ खतरनाक, 16 भूस्खलन क्षेत्र सक्रिय, सड़क में बड़े गड्ढे

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Yamunotri Highway: मानसून का मौसम अब समाप्त होने को है, लेकिन इस दौरान चार धाम को जोड़ने वाली सड़क की हालत बेहद खराब हो गई है। उत्तरकाशी जिले के धरासू-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति बहुत ही दयनीय हो गई है।

इस 102 किलोमीटर लंबे हाईवे पर आठ नए भूस्खलन क्षेत्र बन गए हैं, जबकि पुराने आठ भूस्खलन क्षेत्र भी सक्रिय हो गए हैं और लगभग 50 किलोमीटर का क्षेत्र गड्ढों में तब्दील हो गया है। यह स्थिति आगामी यात्रा सीजन के लिए एक बड़ी समस्या बन सकती है। चार धाम यात्रा का मौसम सितंबर और अक्टूबर के महीनों में होता है।

अगस्त में भारी बारिश

इस बार जुलाई और अगस्त के महीनों में पहाड़ों पर भारी बारिश हुई है। बारिश के कारण सड़क मार्गों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। उत्तरकाशी जिले में, यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पिछले दो महीनों में मानसून के दौरान 16 स्थानों पर 200 घंटे से अधिक समय तक अवरुद्ध रहा। सबसे अधिक अवरुद्ध क्षेत्र डाबरकोट के पास था। डाबरकोट के पास दो महीनों के दौरान 20 से अधिक भूस्खलन हुए हैं।

अभी भी हल्की बारिश में यह भूस्खलन क्षेत्र सक्रिय हो रहा है। सितंबर और अक्टूबर में favorable मौसम के कारण चार धाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में यह भूस्खलन क्षेत्र यात्रा की सुगम संचालन के लिए एक चुनौती है। इस भूस्खलन क्षेत्र का इलाज शुरू होने में समय लगेगा और इसके लिए कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं है।

पिछले आठ वर्षों में, डाबरकोट में सबसे अधिक भूस्खलन की घटनाएं सितंबर और अक्टूबर के महीनों में हुई हैं। इसके अतिरिक्त, फूलचट्टी और जनकी चट्टी के बीच तीन किलोमीटर की दूरी में तीन नए भूस्खलन क्षेत्र बन गए हैं। इन भूस्खलन क्षेत्रों के कारण बसें और भारी वाहन जनकीचट्टी पार्किंग तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसके अलावा, यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग भी कुतनौर और किसलाल के बीच हर दिन अवरुद्ध हो रहा है।

यमुनोत्री हाईवे के नए भूस्खलन क्षेत्र

यमुनोत्री हाईवे के पुराने भूस्खलन क्षेत्र

सड़क की मरम्मत का काम न होने के कारण यात्रियों को इस बार सितंबर और अक्टूबर में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। 12 अगस्त को एक बोलेरो वाहन एक पहाड़ी से गिरे बोल्डर के नीचे आ गया, जिसमें एक की मौत हो गई और दो घायल हो गए। इस प्रकार, डाबरकोट, कुतनौर, खाराड़ी और ओर्चा बैंड जैसे भूस्खलन क्षेत्रों में पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है।

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