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Uttarakhand में महिलाओं के खिलाफ तीन चौंकाने वाले अपराध, कहीं दुष्कर्म का वीडियो वायरल, तो कहीं धर्मांतरण का दबाव

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Uttarakhand, जो कि शांत और सुरम्य पहाड़ियों के लिए जाना जाता है, हाल के दिनों में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों के कारण चर्चा में है। हाल ही में राज्य से तीन ऐसे चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं, जिनमें महिलाओं पर अत्याचार, शोषण और अपराध की घटनाएं सामने आई हैं। ये घटनाएं महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। आइए इन घटनाओं को विस्तार से समझते हैं।

1. दुष्कर्म का वीडियो वायरल: सोशल मीडिया पर शोषण का नया रूप

उत्तराखंड के चमोली जिले के थराली इलाके में एक मुस्लिम समुदाय के युवक ने एक नाबालिग हिंदू लड़की से दोस्ती कर उसे अपने जाल में फंसा लिया। युवक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए लड़की से संपर्क किया और धीरे-धीरे उसे अपने बहकावे में लिया। कुछ समय बाद, युवक ने लड़की के साथ दुष्कर्म किया और इसका वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

Uttarakhand में महिलाओं के खिलाफ तीन चौंकाने वाले अपराध, कहीं दुष्कर्म का वीडियो वायरल, तो कहीं धर्मांतरण का दबाव

इस घटना के बाद इलाके में काफी आक्रोश फैल गया, खासकर हिंदू संगठनों के बीच। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने ग्वालदम थराली देवाल तिराहे पर एक बड़ी जन जागरूकता रैली निकाली। घटना के बाद से इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है और पुलिस व खुफिया एजेंसियां (LIU) सतर्क हैं। पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन इस घटना ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग और महिलाओं के प्रति अपराधों की गंभीरता को उजागर किया है।

2. नाबालिग का अपहरण: पिथौरागढ़ से 14 वर्षीय लड़की को बहला-फुसलाकर भगाया

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से दूसरी घटना सामने आई है, जिसमें एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की का अपहरण कर लिया गया। पुलिस की जांच में पता चला कि मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश का रहने वाला 21 वर्षीय मोहम्मद कैफ लड़की को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया।

लड़की के गायब होने के बाद उसके परिजनों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत लड़की को खोजने का निर्देश दिया। सब-इंस्पेक्टर मीनाक्षी मनराल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने लड़की को सुरक्षित ढूंढ निकाला। आरोपी के खिलाफ धारा 132(2) के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस इस मामले में कानूनी कार्रवाई कर रही है।

यह घटना समाज में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों और नाबालिग लड़कियों के शोषण को दर्शाती है। यह इस बात का भी प्रमाण है कि किस तरह से अपराधी नाबालिगों को बहला-फुसलाकर अपराधों को अंजाम दे रहे हैं।

3. धर्मांतरण का दबाव: हल्द्वानी में युवती पर शादी और धर्म बदलने का दबाव

तीसरी घटना हल्द्वानी के मुखानी थाना क्षेत्र से सामने आई है, जहां यासीन नामक एक युवक ने एक हिंदू लड़की पर धर्मांतरण का दबाव डाला। लड़की ने पुलिस को बताया कि यासीन उसे लगातार फोन और मैसेज करके धर्म बदलने और शादी करने के लिए मजबूर कर रहा था। जब लड़की ने उसकी बात नहीं मानी, तो उसने उसे जान से मारने की धमकियां देनी शुरू कर दीं।

लड़की ने बताया कि उसकी शादी उत्तर प्रदेश के एक जिले में तय हो चुकी है, लेकिन यासीन खान, जो फतेहपुर लामाचौर में एक फर्नीचर की दुकान चलाता है, उसे शादी करने और धर्म बदलने के लिए धमका रहा है। लड़की ने यासीन का नंबर ब्लॉक कर दिया था, लेकिन वह दूसरे नंबर से फोन कर उसे धमकाता रहा।

गुरुवार को, हिंदू संगठनों के सदस्यों ने यासीन की दुकान पर हंगामा किया और उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। मुखानी थाना प्रभारी विजय मेहता ने बताया कि लड़की की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। साथ ही, आरोपी के मोबाइल को जांच के लिए जब्त कर लिया गया है।

महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल: समाज और प्रशासन की भूमिका

ये तीनों घटनाएं यह साबित करती हैं कि उत्तराखंड जैसे शांत राज्य में भी महिलाओं के खिलाफ अपराधों में तेजी से वृद्धि हो रही है। चाहे वह सोशल मीडिया के माध्यम से शोषण हो, नाबालिगों का अपहरण हो, या धर्मांतरण का दबाव, हर स्थिति में महिलाओं की सुरक्षा को गंभीर खतरा है।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका

पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे इन मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई करें। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस गश्त को बढ़ाना और जागरूकता अभियानों को तेज करना जरूरी है। इसके अलावा, साइबर अपराधों को रोकने के लिए साइबर पुलिसिंग को भी मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने वाले अपराधियों को सजा मिल सके।

समाज की भूमिका

समाज की भी इसमें अहम भूमिका है। हमें महिलाओं के प्रति सम्मान और समानता की भावना को बढ़ावा देना होगा। धर्म, जाति या वर्ग के आधार पर किसी पर भी अत्याचार नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, महिलाओं को आत्मरक्षा के तरीकों के बारे में जागरूक करना और उन्हें सशक्त बनाना समय की मांग है।

Manoj kumar

Editor-in-chief

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