Uttarakhand: पिथौरागढ़ में घर में घुसा तेंदुआ, तीन महिलाओं पर किया हमला; शोर मचाने पर भागा जंगल की ओर


Uttarakhand: बुधवार सुबह करीब 5 बजे एक तेंदुआ अचानक सलकोट गाँव के एक घर में घुस गया। घर में मौजूद तीन महिलाएं – पद्मा देवी (50) पत्नी कृष्णा राम, कस्तूरा देवी (40) पत्नी जीवन लाल और मीना देवी (30) पत्नी फकीर राम – उस समय अपने दैनिक काम में व्यस्त थीं। तेंदुआ बिना किसी चेतावनी के सीधे महिलाओं पर झपट पड़ा और उन्हें घायल कर दिया।
महिलाओं की चीखें सुनकर मदद को लोग दौड़ते आए
महिलाओं की चीखें सुनते ही आस-पड़ोस के लोग तुरंत मौके पर पहुँच गए। उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया, जिससे डरकर तेंदुआ वहाँ से भागकर जंगल की ओर चला गया। सभी घायल महिलाओं को तत्काल जिला अस्पताल पिथौरागढ़ ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, महिलाओं को तेंदुए के हमले से काफी चोटें आई हैं, लेकिन उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल
तेंदुए के इस हमले से पूरे गाँव में दहशत फैल गई है। लोग भयभीत हैं कि तेंदुआ फिर से गाँव में आ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए का गाँव में इस तरह प्रवेश करना सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय है। गाँववाले अब अपने बच्चों और पशुओं को बाहर अकेला नहीं छोड़ रहे हैं और सतर्कता बरत रहे हैं।
घायलों का हालचाल लेने पहुँचे नेता और वन विभाग की टीम
घटना की जानकारी मिलते ही भाजपा के राज्य कार्यकारिणी सदस्य वीरेंद्र बोहरा जिला अस्पताल पहुँचे और घायल महिलाओं का हालचाल लिया। उन्होंने जिला वन अधिकारी (DFO) से बात कर इस मामले में मुआवजे की मांग की। बोहरा ने कहा कि तेंदुए के हमले से घायल महिलाओं और उनके परिवार को आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए और वन विभाग को इस क्षेत्र में गश्त बढ़ानी चाहिए, ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वन विभाग की टीम भी सूचना मिलने के बाद गाँव पहुँच गई और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए गाँव के आसपास गश्त तेज करने का आश्वासन दिया है।
ग्रामीणों की मांग – क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई जाए
ग्राम सभा सलकोट के निवासियों ने वन विभाग से आग्रह किया है कि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाए। तेंदुए के अचानक घर में घुसने की घटना ने सभी को हिला कर रख दिया है। लोग वन विभाग से अपेक्षा कर रहे हैं कि वे जल्द से जल्द कोई ठोस कदम उठाएँ। ग्रामीणों का कहना है कि इस घटना के बाद वे अपने घरों में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।
वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाएँ और समाधान की आवश्यकता
यह घटना उत्तराखंड के उन इलाकों में वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं की ओर इशारा करती है, जहाँ आबादी और जंगलों के बीच सीमाएँ धुंधली होती जा रही हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में भोजन और पानी की कमी के कारण तेंदुए जैसे जानवर मानव बस्तियों की ओर रुख करते हैं। सरकार और वन विभाग को इस समस्या के समाधान के लिए दीर्घकालिक कदम उठाने की आवश्यकता है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि वन विभाग को वन्यजीवों के लिए जंगलों में पर्याप्त भोजन और पानी उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि वे मानव बस्तियों में न आएँ। इसके अलावा, गाँवों के आसपास बाड़ और चेतावनी संकेत लगाए जाने चाहिए ताकि तेंदुए जैसे जानवरों का गाँवों में प्रवेश रोका जा सके।
वन विभाग की अपील – सतर्क रहें और सावधानी बरतें
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और सावधानी बरतें। विशेष रूप से सुबह और शाम के समय, जब तेंदुए और अन्य वन्यजीव ज्यादा सक्रिय होते हैं। वन विभाग ने कहा कि ग्रामीण अपने घरों के आसपास रोशनी का इंतजाम करें और छोटे बच्चों और बुजुर्गों को अकेला न छोड़ें। यदि किसी को तेंदुए या अन्य खतरनाक जानवर की गतिविधि का पता चलता है, तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें।
इस प्रकार, पिथौरागढ़ में तेंदुए के हमले की यह घटना एक बार फिर से जंगल और मानव बस्तियों के बीच बढ़ते संघर्ष को उजागर करती है। इसे देखते हुए वन विभाग और प्रशासन को सुरक्षा और सतर्कता के उपायों को प्राथमिकता देनी होगी। ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक समाधान ढूँढना और इस प्रकार की घटनाओं को रोकना आवश्यक है।






