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युवाओं की भागीदारी से साकार होगा विकसित भारत-2047 का संकल्प: डॉ धन सिंह रावत

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तकनीकी विश्वविद्यालय में विज्ञान सेतु-कनेक्टिंग स्टूडेंट्स कार्यक्रम में युवाओं ने ली नशामुक्त जीवन की शपथ

देहरादून: वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित “विज्ञान सेतु–कनेक्टिंग स्टूडेंट्स” कार्यक्रम में “युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करने व स्टेम (STEM) शिक्षा को बढ़ावा देने पर विचार रखे गये।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अपने सम्बोधन में कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच युवाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से विज्ञान सेतु जैसे कार्यक्रमों में अधिकाधिक भागीदारी करने का आह्वान किया। डॉ रावत ने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में युवाओं की सक्रिय भूमिका महत्वपूर्ण है।

डॉ. रावत ने नशामुक्त युवा और जागरूक समाज को विकसित भारत की आधारशिला बताते हुए युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थी विज्ञान आंदोलन एवं विद्यार्थी विज्ञान मंथन के माध्यम से वैज्ञानिक जिज्ञासा, प्रश्न करने की प्रवृत्ति, फिजिक्स ओलंपियाड, प्रयोगात्मक एवं हैंड्स-ऑन लर्निंग के महत्व पर अपने विचार रखे। साथ ही उन्होंने नशामुक्ति एवं विकसित भारत के संकल्प की शपथ भी दिलाई।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने विद्यार्थियों को मूलभूत विज्ञान की मजबूत समझ विकसित करने तथा विज्ञान को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया। हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उपलब्ध करियर अवसरों तथा उत्तराखण्ड में वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।

इस अवसर पर तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) तृप्ता ठाकुर ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं कौशल विकास की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को तकनीकी एवं कौशल आधारित गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम (ISGF) व वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मध्य समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर भी किए गए। समझौते का उद्देश्य प्रौद्योगिकी, नवाचार तथा भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं से जुड़े क्षेत्रों में दोनों संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करना है। इससे विद्यार्थियों को उभरती तकनीकों, नवाचार एवं व्यावहारिक तकनीकी ज्ञान के क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे।

कार्यक्रम में प्रो. दुर्गेश पंत, महानिदेशक, यूकॉस्ट; डॉ. डी.पी. उनियाल, संयुक्त निदेशक, यूकॉस्ट, डॉ. रेजी कुमार पिल्लई, चेयरमैन, आईएसजीएफ, डॉ. शिव कुमार शर्मा, राष्ट्रीय संगठन सचिव, वीआईबीएचए ; डॉ. के.डी. पुरोहित, अध्यक्ष, DBVS, VIBHA उत्तराखण्ड प्रान्त; डॉ. नरेंद्र सिंह, सचिव DBVS सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

 

 

Manoj kumar

Editor-in-chief

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