Uttarakhand: स्कूल छात्राओं ने कहा – बदमाश गंदे टिप्पणियां करते हैं, असुरक्षित स्थानों की पहचान के लिए कार्यशाला आयोजित

Uttarakhand: लड़कियाँ स्कूल आते-जाते समय बदमाशों द्वारा परेशान किए जाने की शिकायतें करती हैं। इस दौरान उन्हें कई असुरक्षित स्थानों पर असहज स्थितियों का सामना करना पड़ता है। यह हकीकत लड़कियों ने मंगलवार को गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल में महिला और बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित एक कार्यशाला में बताई।
असुरक्षित स्थानों की पहचान पर कार्यशाला
असुरक्षित स्थानों की पहचान से संबंधित कार्यशाला में अतिरिक्त निदेशक प्रशिक्षण रिचा सिंह ने लड़कियों से उन स्थानों के बारे में पूछा जहां वे आते-जाते समय असुरक्षित महसूस करती हैं। बाल विकास परियोजना अधिकारी शिल्पा जोशी ने लड़कियों से बिना किसी डर के अपने विचार व्यक्त करने के लिए कहा। इस कार्यशाला का उद्देश्य यह था कि लड़कियाँ अपने अनुभव साझा कर सकें और असुरक्षित स्थानों की पहचान करवाई जा सके ताकि उनके सुरक्षा उपाय किए जा सकें।
लड़कियों ने बताई असुरक्षित स्थानों की सूची
छात्राओं ने बताया कि वे किस प्रकार की समस्याओं का सामना करती हैं और किन स्थानों पर उन्हें असुरक्षित महसूस होता है। उन्होंने जिन असुरक्षित स्थानों का उल्लेख किया उनमें शामिल हैं:
- रिलायंस मॉल कमलुवागंज के पीछे का आम का बाग़
- कलाश गार्डन के आस-पास
- गोविंदपुर गढ़वाल
- भगवानपुर रोड ऑटो स्टैंड
- हरगोविंद सुयाल स्कूल के पास की दुकानें
- मैट्रिक्स अस्पताल के पास की गलियाँ
- बोहरा कॉलोनी
- बच्ची नगर
- लमाचौर
- भारतपुर
- कमलुवागंज चौराहा
छात्राओं ने बताया कि इन स्थानों पर बदमाश बाइक पर आते हैं और उन्हें अश्लील टिप्पणियां करते हैं और गलत तरीके से छूते हैं।
सुरक्षा उपायों की मांग
छात्राओं ने कार्यशाला में कई सुरक्षा उपायों की मांग की। उन्होंने कहा कि:
- मजदूरों की सत्यापन: आस-पास के क्षेत्रों में काम कर रहे मजदूरों की पहचान सुनिश्चित की जाए।
- सड़क पर लाइटें लगाना: असुरक्षित गलियों और स्थानों पर स्ट्रीट लाइट्स लगाई जाएं ताकि अंधेरे में कोई भी अप्रिय घटना घटित न हो।
- ऑटो और ई-रिक्शा ड्राइवरों की जांच: सार्वजनिक परिवहन के साधनों पर बैठने से पहले ड्राइवरों की पूरी जांच की जाए।
कार्यशाला में उपस्थित लोग
इस कार्यशाला में जिला परिवीक्षाधिकारी की ओर से तबस्सुम, एसआई ज्योति कोरंगा, यशोधा शाह और अन्य अधिकारी उपस्थित थे। इन सभी ने लड़कियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की बात की।
महिलाओं और बच्चों के विकास के लिए कदम
महिला और बाल विकास विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लड़कियों को एक सुरक्षित माहौल प्रदान करना है। इस प्रकार की कार्यशालाओं के माध्यम से न केवल समस्याओं की पहचान की जाती है, बल्कि उनके समाधान के लिए सुझाव भी लिए जाते हैं। यह कार्यशाला लड़कियों को अपने विचार व्यक्त करने और उनकी समस्याओं को सामने लाने का एक मंच प्रदान करती है।
समाज की जिम्मेदारी
सिर्फ सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है कि वे सुरक्षा के उपाय करें। समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा ताकि हर व्यक्ति को सुरक्षित और सम्मानित महसूस हो सके। इसके लिए जरूरत है कि समाज के लोग और संगठनों को अपनी जिम्मेदारियां समझनी होगीं और साकारात्मक पहल करनी होगीं।
- पुलिस और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी: पुलिस और स्थानीय प्रशासन को असुरक्षित क्षेत्रों में गश्त बढ़ानी चाहिए और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए।
- सामाजिक संगठनों की भूमिका: सामाजिक संगठनों को भी इस दिशा में काम करने की जरूरत है ताकि वे लोगों को सुरक्षा के प्रति जागरूक कर सकें और सुरक्षित माहौल बना सकें।
- शिक्षा और जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में सुरक्षा और सम्मान के महत्व पर शिक्षा दी जानी चाहिए ताकि युवा पीढ़ी को इस मुद्दे पर संवेदनशील बनाया जा सके।
निष्कर्ष
इस कार्यशाला ने यह साबित कर दिया है कि लड़कियाँ और महिलाएं भी अपनी आवाज उठा सकती हैं और समाज के असुरक्षित पहलुओं को उजागर कर सकती हैं। यह एक सकारात्मक कदम है जो उन्हें सुरक्षा के प्रति जागरूक करता है और समाज को यह समझने में मदद करता है कि हमें एक साथ मिलकर काम करना होगा ताकि हर जगह सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित हो सके।






