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Squadron Leader Mohana Singh: वायुसेना की स्क्वाड्रन लीडर मोहना सिंह का ऐतिहासिक कारनामा, बनीं तेजस लड़ाकू विमान उड़ाने वाली पहली महिला पायलट

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Squadron Leader Mohana Singh: भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन लीडर मोहना सिंह ने इतिहास रच दिया है। वह भारत की पहली महिला लड़ाकू पायलट बन गई हैं जिन्होंने स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस को उड़ाया है। मोहना सिंह ने ’18 फ्लाइंग बुलेट्स’ स्क्वाड्रन में शामिल होकर तेजस लड़ाकू विमान उड़ाने का श्रेय प्राप्त किया है। यह उपलब्धि उनके करियर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो भारतीय वायुसेना के लिए गर्व का कारण बनी है।

Squadron Leader Mohana Singh: वायुसेना की स्क्वाड्रन लीडर मोहना सिंह का ऐतिहासिक कारनामा, बनीं तेजस लड़ाकू विमान उड़ाने वाली पहली महिला पायलट

मोहना सिंह की ऐतिहासिक उड़ान

स्क्वाड्रन लीडर मोहना सिंह ने हाल ही में जोधपुर में हुए तरंग शक्ति अभ्यास में भाग लिया, जहां उन्होंने तेजस लड़ाकू विमान की ऐतिहासिक उड़ान भरी। इस मौके पर तीनों सशस्त्र बलों के उपप्रमुख भी मौजूद थे। एयर फोर्स के उपप्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह ने मुख्य लड़ाकू विमान उड़ाया, जबकि आर्मी के उपप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रहमण्यम और नेवी के उपप्रमुख वाइस एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने दो-सीटर विमान उड़ाए।

तेजस का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा किया गया है, और यह वायु मुकाबले और आक्रामक वायु समर्थन अभियानों के लिए एक सक्षम विमान है। इसे टोही और एंटी-शिप ऑपरेशंस के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

मोहना सिंह का वायुसेना में योगदान

मोहना सिंह ने भारतीय वायुसेना में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। उन्होंने भारतीय वायुसेना के फाइटर स्क्वाड्रन में आठ साल पहले शामिल होकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त की थी। मोहना सिंह, स्क्वाड्रन लीडर भवाना कंठ और अवनी चतुर्वेदी के साथ, भारतीय वायुसेना की पहली महिला लड़ाकू पायलटों के प्रारंभिक त्रिमूर्ति का हिस्सा थीं।

इन तीनों पायलटों ने वायुसेना के लड़ाकू बेड़े के कई विमानों को उड़ाया है और अपने पेशेवर कौशल के लिए सराहना प्राप्त की है। भवाना कंठ और अवनी चतुर्वेदी वर्तमान में पश्चिमी रेगिस्तान में सुखोई 30 एमकेआई लड़ाकू विमानों को उड़ा रही हैं। मोहना सिंह की इस नई उपलब्धि ने वायुसेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को और अधिक उजागर किया है।

महिलाओं की भागीदारी का विस्तार

2016 में भारतीय वायुसेना ने महिला पायलटों के लिए लड़ाकू स्ट्रीम खोलने की घोषणा की थी। इसके बाद से वायुसेना में अब तक लगभग 20 महिला लड़ाकू पायलटों की संख्या हो गई है। यह एक महत्वपूर्ण कदम था जो महिला पायलटों को वायुसेना के लड़ाकू बेड़े में सक्रिय भूमिका निभाने का मौका प्रदान करता है।

इस पहल ने महिलाओं के लिए वायुसेना में करियर की नई संभावनाएं खोली हैं और उन्हें उच्चतम स्तर पर अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान किया है। मोहना सिंह की तेजस लड़ाकू विमान उड़ाने की उपलब्धि इस दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होती है।

तेजस: स्वदेशी विमानों की सफलता

तेजस विमान को भारतीय वायुसेना के लिए विशेष रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है। यह विमान विभिन्न प्रकार की मिडियम रेंज की एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलों से लैस है और यह वायुसेना की रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। तेजस की डिजाइन और निर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाया गया है और यह भारतीय वायुसेना के लिए एक गर्व का विषय है।

तेजस की क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए, यह स्वदेशी विमान भारतीय वायुसेना की सामरिक शक्ति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी क्षमताओं में हवा से हवा में और हवा से जमीन पर हमला करने की ताकत शामिल है, जो इसे वायु युद्ध और आक्रामक अभियानों के लिए अत्यधिक सक्षम बनाती है।

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता

तेजस और मोहना सिंह की उपलब्धियों को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। मोहना सिंह की तेजस उड़ान ने भारतीय वायुसेना की क्षमता और महिला पायलटों की प्रभावशाली भूमिका को उजागर किया है। इसके साथ ही, तेजस के सफल परीक्षण और परिचालन ने भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक मान्यता दिलाई है।

भविष्य की दिशा

मोहना सिंह की तेजस उड़ान और महिला पायलटों की बढ़ती भूमिका भविष्य में वायुसेना और रक्षा क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को और बढ़ावा देगी। यह उम्मीद की जाती है कि आने वाले वर्षों में और भी महिला पायलट वायुसेना की लड़ाकू स्क्वाड्रन में शामिल होंगी और अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगी।

वायुसेना और रक्षा क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं और मोहना सिंह की उपलब्धियों ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इससे न केवल महिला पायलटों की संख्या में वृद्धि होगी बल्कि भारतीय वायुसेना की समग्र ताकत और प्रभावशीलता में भी सुधार होगा।

Manoj kumar

Editor-in-chief

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