EPF की नई सीमा से पंजाब के करीब दो लाख कर्मचारियों को फायदा, उद्योग पर बढ़ेगा खर्च

केंद्र के फैसले से अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारी भी EPF के दायरे में आएंगे; नियोक्ताओं के योगदान का बोझ बढ़ने की संभावना
चंडीगढ़। कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) को लेकर केंद्र सरकार के हालिया फैसले का असर पंजाब के कर्मचारियों और औद्योगिक क्षेत्र दोनों पर पड़ने वाला है। सरकार ने EPF के लिए अनिवार्य वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दिया है। इस बदलाव से पंजाब में करीब दो लाख अतिरिक्त कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में आ सकते हैं।
नई व्यवस्था के तहत ₹25,000 तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए EPF कवरेज का दायरा बढ़ेगा। इसके साथ कर्मचारियों को भविष्य निधि के अलावा पेंशन और बीमा से जुड़े लाभ भी मिलेंगे। देशभर में इस बदलाव से करीब 51 लाख अतिरिक्त कर्मचारियों के EPFO के दायरे में आने का अनुमान है।
हालांकि, इस फैसले का दूसरा पहलू औद्योगिक इकाइयों से जुड़ा है। EPF में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान होता है, ऐसे में वेतन सीमा बढ़ने के बाद पात्र कर्मचारियों के लिए कंपनियों का योगदान भी बढ़ सकता है। इससे उद्योगों की श्रम लागत पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है।
कर्मचारियों के लिए भी इसका असर केवल भविष्य की बचत तक सीमित नहीं रहेगा। जिन कर्मचारियों पर पहले नई सीमा के कारण अनिवार्य EPF योगदान लागू नहीं होता था, उनके वेतन से अब अधिक राशि PF के रूप में कट सकती है। इससे कुछ मामलों में मासिक हाथ में मिलने वाला वेतन कम हो सकता है, जबकि सेवानिवृत्ति के लिए बचत बढ़ेगी।
EPF की वेतन सीमा में यह बदलाव लंबे अंतराल के बाद किया गया है। केंद्र सरकार के अनुसार, नई सीमा का उद्देश्य बदलती वेतन संरचना के अनुरूप सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाना है। सरकार को भी इस बदलाव के तहत अतिरिक्त वित्तीय भार उठाना होगा।


