एफबीआई के शिकंजे में अमेरिकी इंजीनियर, हूती विद्रोहियों को मदद देने का गंभीर आरोप

एफबीआई के मुताबिक आरोपी ने यमन की कथित गुप्त यात्रा की और हूती संगठन की संचार क्षमताओं में मदद पहुंचाने के लिए सामग्री व तकनीकी सहायता जुटाई
वॉशिंगटन। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने ऊर्जा विभाग से जुड़े एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को ईरान समर्थित हूती संगठन को कथित तौर पर सहायता पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, आरोपी पर यमन की यात्रा करने, हूती संगठन से संपर्क स्थापित करने और विस्फोटक व ड्रोन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जुटाने का आरोप है। मामले की जांच के दौरान उसके कथित संपर्कों और गतिविधियों से जुड़ी कई जानकारियां सामने आई हैं।
अमेरिकी इंजीनियर पर क्या आरोप हैं?
वॉशिंगटन राज्य के रिचलैंड निवासी 51 वर्षीय एश्टन हमीद एलाबूडी को गिरफ्तार किया गया। उसे अदालत के सामने पेश किया जाना है। अदालत के उपलब्ध रिकॉर्ड में फिलहाल उसकी ओर से पेश होने वाले किसी वकील का नाम दर्ज नहीं है।
एफबीआई के मुताबिक, एलाबूडी पर आरोप है कि वह हूती संगठन की संचार क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करना चाहता था। जांच एजेंसी के अनुसार, वह पिछले सितंबर में यमन गया था। यमन में लंबे समय से हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थित बलों के बीच संघर्ष जारी है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यमन से लौटने के बाद एलाबूडी ने सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा अधिकारियों को बताया था कि वह ओमान से काम के सिलसिले में वापस आया है। उसने कथित तौर पर यह भी बताया कि वह अमेरिकी सरकार से जुड़े एक मिशन का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य मिसाइल रक्षा प्रणालियों का निरीक्षण करना था।
सुपरवाइजर के बयान से सामने आई अलग जानकारी
एफबीआई के हलफनामे में कहा गया है कि जांचकर्ताओं ने एलाबूडी के सुपरवाइजर से पूछताछ की। सुपरवाइजर ने कथित तौर पर बताया कि उन्हें एलाबूडी की किसी अंतरराष्ट्रीय यात्रा की जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा विभाग में उनकी जानकारी के मुताबिक ऐसा कोई मिसाइल निरीक्षण कार्यक्रम नहीं था, जिसके तहत एलाबूडी को यमन या ओमान भेजा गया हो।
जांच एजेंसी के मुताबिक, उसके मुखबिरों ने एलाबूडी के साथ हुई कुछ बातचीत रिकॉर्ड की थी। इन बातचीत में उसने कथित तौर पर बताया कि उसे यमन में गुप्त तरीके से प्रवेश करना और वहां से बाहर निकलना पड़ा। उसने यमन की राजधानी सना पहुंचकर वहां उच्च स्तर पर संपर्क स्थापित करने की इच्छा भी जताई थी। हालांकि, एफबीआई के अनुसार वह सना पहुंचने में सफल नहीं हो सका।
विस्फोटक और ड्रोन की सामग्री खरीदने का आरोप
एफबीआई के अनुसार, एलाबूडी के खिलाफ जांच उस समय शुरू हुई जब अधिकारियों को उसके द्वारा कुछ ऐसे रसायनों की खरीदारी की जानकारी मिली, जिनका इस्तेमाल घरेलू स्तर पर विस्फोटक उपकरण तैयार करने में किया जा सकता है। इनमें एसीटोन और सोडियम बाइसल्फेट शामिल बताए गए हैं। जांच में ड्रोन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कुछ पुर्जों की खरीद का भी उल्लेख किया गया है।
जांच के दौरान एलाबूडी ने कथित तौर पर कई मुखबिरों से संपर्क किया। एफबीआई के मुताबिक, इनमें एक व्यक्ति ऐसा भी था जिसने खुद को हूती कर्नल के रूप में पेश किया था। एजेंसी का आरोप है कि एलाबूडी ने संचार उपकरणों से जुड़ी सलाह और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई।
किस कानून के तहत हुई कार्रवाई?
अमेरिकी अधिकारियों ने एलाबूडी पर उस कानून के तहत आरोप लगाया है, जिसके तहत अमेरिका द्वारा विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किए गए किसी समूह को भौतिक सहायता उपलब्ध कराना अपराध है। मामले में लगाए गए आरोप एफबीआई की जांच और अदालत में पेश किए गए हलफनामे पर आधारित हैं। आगे की कानूनी कार्यवाही में आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों पर अदालत में विचार किया जाएगा।



