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अखरोट या बादाम, दिमाग के लिए कौन ज्यादा फायदेमंद? जानिए दोनों के पोषक तत्वों और स्वास्थ्य लाभों के बारे में

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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शरीर के साथ-साथ दिमाग को स्वस्थ रखना भी बेहद जरूरी है। इसके लिए संतुलित आहार की अहम भूमिका होती है। अखरोट और बादाम ऐसे सूखे मेवे हैं, जिन्हें पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है। दोनों में मौजूद अलग-अलग पोषक तत्व मस्तिष्क, हृदय और शरीर के सामान्य कामकाज को बेहतर बनाए रखने में योगदान दे सकते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि दिमाग की सेहत के लिए अखरोट ज्यादा फायदेमंद है या बादाम।

विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों मेवों की अपनी खूबियां हैं। अखरोट पौधों से मिलने वाले ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत है, जबकि बादाम विटामिन ई, मैग्नीशियम, प्रोटीन और फाइबर उपलब्ध कराता है। इसलिए किसी एक को सभी लोगों के लिए बेहतर बताने के बजाय दोनों के पोषण संबंधी फायदों को समझना जरूरी है।

अखरोट में मौजूद ओमेगा-3 दिमाग के लिए उपयोगी

अखरोट में अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA) पाया जाता है, जो ओमेगा-3 फैटी एसिड का एक प्रकार है। यह मस्तिष्क की सामान्य कार्यप्रणाली और कोशिकाओं के स्वास्थ्य के लिए जरूरी पोषण का हिस्सा है। अखरोट में पॉलीफेनॉल जैसे एंटीऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं, जो शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में भूमिका निभाते हैं।

स्पेन में किशोरों पर किए गए एक अध्ययन में अखरोट के सेवन और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता के बीच संभावित संबंध देखा गया था। अध्ययन में 11 से 16 वर्ष की उम्र के करीब 700 किशोर शामिल थे। उन्हें छह महीने तक रोजाना 30 ग्राम अखरोट खाने के लिए कहा गया। अध्ययन के निष्कर्षों में नियमित रूप से अखरोट खाने वाले कुछ प्रतिभागियों में ध्यान से जुड़े सकारात्मक संकेत सामने आए।

हालांकि, इस तरह के शोध से यह साबित नहीं होता कि केवल अखरोट खाने से याददाश्त बढ़ती है या मस्तिष्क संबंधी बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। दिमाग की सेहत के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण हैं।

बादाम भी दिमाग के लिए क्यों है फायदेमंद?

बादाम में विटामिन ई, मैग्नीशियम, प्रोटीन, फाइबर और असंतृप्त वसा पाई जाती है। इनमें मौजूद विटामिन ई कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव नुकसान से बचाने में मदद करता है। वहीं, मैग्नीशियम तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है।

बादाम में मौजूद प्रोटीन और फाइबर शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ पेट भरा रहने में भी मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, इसमें पाई जाने वाली असंतृप्त वसा संतुलित आहार का हिस्सा है और हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में योगदान दे सकती है।

हालांकि, बादाम खाने से याददाश्त बढ़ने या एकाग्रता में सुधार होने की गारंटी नहीं दी जा सकती। इसके लाभ व्यक्ति के संपूर्ण खानपान और जीवनशैली पर भी निर्भर करते हैं।

अखरोट और बादाम में क्या है मुख्य अंतर?

अखरोट: इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड ALA और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। जो लोग पौधों से मिलने वाले ओमेगा-3 का अच्छा स्रोत तलाश रहे हैं, उनके लिए अखरोट उपयोगी विकल्प है।

बादाम: इसमें विटामिन ई, मैग्नीशियम, प्रोटीन और फाइबर अच्छी मात्रा में मिलते हैं। ये पोषक तत्व शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली और संतुलित आहार की जरूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं।

दोनों मेवों की पोषण संबंधी खूबियां अलग हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि अखरोट हर मामले में बादाम से बेहतर है या बादाम के सभी फायदे अखरोट से अधिक हैं।

बच्चों की डाइट में भी शामिल कर सकते हैं मेवे

बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए संतुलित आहार जरूरी है। उम्र के अनुसार उचित मात्रा में अखरोट और बादाम देने से उन्हें जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं। हालांकि, छोटे बच्चों को साबुत मेवे देने से दम घुटने का खतरा हो सकता है। इसलिए उनकी उम्र और खाने की क्षमता के अनुसार मेवों को बारीक पीसकर या उपयुक्त रूप में देना चाहिए। एलर्जी की आशंका होने पर विशेष सावधानी बरतें।

रोजाना कितनी मात्रा में खाएं?

अखरोट और बादाम को सीमित मात्रा में रोजाना के आहार में शामिल किया जा सकता है। सामान्य तौर पर एक छोटी मुट्ठी बिना नमक वाले मिश्रित मेवे कई लोगों के लिए व्यावहारिक विकल्प हो सकते हैं। हालांकि, सही मात्रा उम्र, कुल कैलोरी जरूरत, स्वास्थ्य और अन्य आहार संबंधी स्थितियों पर निर्भर करती है।

Manoj kumar

Editor-in-chief

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