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उत्तर कोरिया का नया सैन्य दांव, पनडुब्बी से दागी जाने वाली मिसाइलों का किया परीक्षण

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परमाणु ताकत बढ़ाने में जुटा उत्तर कोरिया

प्योंगयांग। उत्तर कोरिया ने अपनी सैन्य और परमाणु क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम उठाया है। अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ बातचीत लंबे समय से ठप होने के बीच देश ने पनडुब्बी से दागी जाने वाली क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया है। उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया के अनुसार, देश के पूर्वी समुद्री क्षेत्र में दो प्रकार की मिसाइलों का परीक्षण किया गया। इन हथियारों को रणनीतिक श्रेणी का बताया गया है, जिससे इनके परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि मिसाइलें वास्तविक पनडुब्बी से दागी गईं या पानी के भीतर बने किसी परीक्षण मंच से।

परमाणु क्षमता और नौसेना को मजबूत करने पर जोर

उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया के मुताबिक, परीक्षण का उद्देश्य समुद्र के भीतर इस्तेमाल होने वाली हथियार प्रणालियों की क्षमता परखना और नौसेना की रणनीतिक ताकत को बढ़ाना था। इसके साथ ही देश अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को भी अधिक प्रभावी दिखाना चाहता है। हालांकि, परीक्षण को लेकर दक्षिण कोरिया की सेना की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

हाइपरसोनिक मिसाइलों के बाद समुद्री हथियारों पर ध्यान

उत्तर कोरिया हाल के दिनों में लगातार अपनी नई हथियार प्रणालियों का परीक्षण कर रहा है। इससे पहले 20 सितंबर और 3 अक्टूबर को हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणालियों के परीक्षण किए गए थे। उत्तर कोरिया का दावा है कि इन हथियारों के विकास से दक्षिण कोरिया और जापान की मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भेदने की क्षमता बढ़ेगी। अब समुद्र से दागी जाने वाली क्रूज मिसाइलों का परीक्षण उसकी सैन्य तैयारियों में एक और अहम कदम माना जा रहा है।

नए युद्धपोत और सैन्य अभ्यास से बढ़ीं गतिविधियां

उत्तर कोरिया ने हाल के सप्ताहों में कई लाइव-फायर सैन्य अभ्यास किए हैं। इसके अलावा, एक नए युद्धपोत को भी नौसेना में शामिल किया गया है। इन गतिविधियों के जरिए देश के नेता किम जोंग उन सैन्य और परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। दूसरी ओर, अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने की दिशा में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ बातचीत पर गतिरोध

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के संबंध पिछले कई वर्षों से तनावपूर्ण बने हुए हैं। किम जोंग उन दक्षिण कोरिया को स्थायी दुश्मन बता चुके हैं, जबकि अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता भी लंबे समय से बंद है। वर्ष 2019 में बातचीत टूटने के बाद किम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से वार्ता बहाल करने की अपीलों को स्वीकार नहीं किया है।

उत्तर कोरिया की मांग है कि अमेरिका उसके प्रति शत्रुतापूर्ण नीति समाप्त करे और बातचीत के लिए परमाणु निरस्त्रीकरण की शर्त पर जोर देना बंद करे। ऐसे में नए मिसाइल परीक्षणों से पूर्वी एशिया में सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका है। साथ ही, दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

Manoj kumar

Editor-in-chief

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