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छात्रावासों में डिजिटल क्लासरूम और आधुनिक लाइब्रेरी से हाईटेक होगी शिक्षा

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पहले चरण में 15 अनुसूचित जाति एवं जनजातीय छात्रावासों में विकसित होंगी आधुनिक अध्ययन सुविधाएं

डिजिटल संसाधनों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मिलेगा लाभ

देहरादून। उत्तराखंड में अनुसूचित जाति एवं जनजातीय छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा संसाधनों से जोड़ने के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसके तहत प्रदेश के 15 छात्रावासों में डिजिटल क्लासरूम, आधुनिक लाइब्रेरी और रीडिंग रूम विकसित किए जाएंगे। इन सुविधाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी आवश्यक अध्ययन सामग्री और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो सकेगा।

सचिव समाज कल्याण डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी ने बताया कि प्रथम चरण में प्रदेश के 15 अनुसूचित जाति एवं जनजातीय छात्रावासों में आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन छात्रावासों में एलईडी स्क्रीन, लैपटॉप, हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी और वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही पुस्तकालयों में पाठ्यक्रम आधारित पुस्तकों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से संबंधित उपयोगी पुस्तकें भी रखी जाएंगी। वहीं, रीडिंग रूम के माध्यम से विद्यार्थियों को शांत और व्यवस्थित वातावरण में अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने बताया कि दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यह पहल की जा रही है। डिजिटल क्लासरूम के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों तक पहुंच मिलेगी। साथ ही, इन सुविधाओं का लाभ छात्रावासों में निवासरत विद्यार्थियों के अतिरिक्त आसपास के क्षेत्रों में रहकर अध्ययन करने वाले युवाओं को भी मिल सकेगा।

इस पहल का विशेष लाभ उन युवाओं को मिलने की उम्मीद है, जो संघ लोक सेवा आयोग, राज्य लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, बैंकिंग सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें एक ही स्थान पर अध्ययन सामग्री, डिजिटल संसाधन और पुस्तकालय की सुविधा उपलब्ध होने से तैयारी में सहूलियत मिलेगी। विशेषकर दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में प्रदेश में 15 अनुसूचित जाति तथा 5 जनजातीय छात्रावास संचालित हैं। इन छात्रावासों में आधुनिक शैक्षणिक आधारभूत सुविधाओं का विकास विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। समाज कल्याण विभाग का उद्देश्य छात्रावासों को केवल आवासीय सुविधा तक सीमित न रखते हुए उन्हें अध्ययन, डिजिटल शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपयोगी केंद्रों के रूप में विकसित करना है।

Manoj kumar

Editor-in-chief

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